दूसरी तिमाही में एक लड़का होने के लक्षण?HealthPlanet

Posted on Mon 16th Dec 2019 : 12:40

दूसरी तिमाही में लड़का होने के लक्षण - Signs of having baby boy in second trimester in Hindi

सुनिए कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

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प्रेगनेंसी में होने वाले बेबी को लेकर के कई तरह की बातें की जाती हैं. इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा का विषय ये रहता है कि बेबी बॉय होगा या बेबी गर्ल. इससे संबंधित कई पुरानी मान्यताएं भी चली आ रही हैं. कुछ ऐसी मान्यता प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में बेबी बॉय होने के संबंध में है. घर के बड़े-बुजुर्ग कुछ विशेष लक्षणों के आधार पर बताने का प्रयास करते हैं कि लड़का होने वाला है या लड़की. वहीं, वैज्ञानिक शोध की बात करें, तो इन मान्यताओं का कोई आधार नजर नहीं आता.

आज इस लेख में हम दूसरी तिमाही के उन लक्षणों के बारे में बात करेंगे, जिन्हें लड़का होने ये जोड़कर देखा जाता है -



दूसरी तिमाही के लक्षण व बेबी बॉय होने के मिथ
मॉर्निंग सिकनेस
स्किन कंडीशन
फूड क्रेविंग्स
हार्ट रेट
शरीर का झुकाव
सारांश

दूसरी तिमाही में लड़का होने के लक्षण के डॉक्टर
दूसरी तिमाही के लक्षण व बेबी बॉय होने के मिथ

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस, स्किन की कंडीशन और फूड क्रेविंग की गंभीरता के आधार पर बताया जाता है कि लड़का होगा या लड़की. आइए, इन लक्षणों व उसके पीछे की सच्चाई के बारे में जानते हैं -
मॉर्निंग सिकनेस

ये चर्चा वर्षों से चली आ रही है कि मॉर्निंग सिकनेस की गंभीरता से बच्चे के लिंग का पता चलता है. अगर गर्भ में लड़की होती है, तो दूसरी तिमाही में प्रेगनेंसी हार्मोन लेवल बढ़ जाता है. यही कारण है कि उसे मॉर्निंग सिकनेस की समस्या ज्यादा रहती है. वहीं, अगर लड़का हो, तो उस समय मॉर्निंग सिकनेस कम या न के बराबर होती है.

क्या है सच : सच तो यह है कि हर गर्भवती महिला में मॉर्निंग सिकनेस की गंभीरता अलग-अलग होती है.


स्किन कंडीशन

लोक मान्यता है कि अगर गर्भ में लड़का है, तो दूसरी तिमाही में महिला की खूबसूरती पर कोई असर नहीं पड़ता है. वहीं, यदि लड़की है, तो उससे गर्भवती महिला की स्किन खराब हो जाती है, उसे मुंहासों की समस्या हो सकती है. कुछ ऐसा ही अंधविश्वास बालों की ग्रोथ को लेकर भी है. दूसरी तिमाही में लड़का होने के लक्षण के तौर पर गर्भवती महिला के बाल लंबे और चमकदार हो जाते हैं. वहीं, यदि लड़की हो, तो बाल बेजान दिखने लगते हैं.

क्या है सच : प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला में हार्मोन अलग-अलग तरीके से रिएक्ट करते हैं. ऐसे में इस आधार पर गर्भ में पल रहे भ्रूण का लिंक पता करना मुश्किल है.


फूड क्रेविंग्स

दूसरी तिमाही में लड़का होने के लक्षण के तौर पर गर्भवती महिला को अचार व आलू के चिप्स जैसी नमकीन व खट्टी चीजें खाने में अच्छी लगती हैं. वहीं, अगर दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला को मीठी चीजें खाने का मन करे, तो इसका मतलब है कि लड़की होगी.

क्या है सच : गर्भावस्था में फूड क्रेविंग्स को लेकर ऐसी किसी भी शोध की खबर सामने नहीं आई है. इन फूड क्रेविंग्स के बारे में कहा जाता है कि ये गर्भवती महिला की न्यूट्रिशनल जरूरतों के अनुसार बदलती रहती है.


हार्ट रेट

बच्चे के हार्ट रेट को लेकर भी लिंग निर्धारण की बातें होती रहती हैं. यदि दूसरी तिमाही में बच्चे की हार्ट बीट प्रति मिनट 140 के नीचे है, तो बच्चे के लड़का होने की संभावना मानी जाती है. वहीं, यदि हार्ट बीट 140 से ज्यादा है, तो लड़की होने की बात कही जाती है.

क्या है सच : बेशक, वैज्ञानिक तरीके से भ्रूण की हार्ट बीट को चेक किया जा सकता है, लेकिन इस आधार पर लड़का या लड़की का पता करना असंभव है. एक शोध के अनुसार प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में लड़के और लड़की के हार्ट रेट में कोई भी अंतर नहीं पाया जाता है.


शरीर का झुकाव

कहा जाता है कि यदि गर्भवती महिला दूसरी तिमाही में झुककर चलती है, तो उसे लड़का ही होगा. वहीं, अगर सीधा होकर चलती है, तो लड़की होने की संभावना रहती है.

क्या है सच : प्रेगनेंसी के दौरान एक गर्भवती महिला किस तरह से चलती है या खुद को हैंडल करती है, यह उसके यूट्रस के शेप, यूनिक बॉडी टाइप और एब्डॉमिनल मसल्स पर निर्भर करता है. इसका लड़का या लड़की होने के पीछे कोई संबंध नहीं है.


सारांश

दूसरी तिमाही में लड़का होने के लक्षण के तौर पर फूड क्रेविंग्स, मॉर्निंग सिकनेस, स्किन की कंडीशन आदि को जोड़कर देखा जाता है, जबकि सच तो यह है कि ये सारी चीजें गर्भवती महिला के हार्मोन और प्रेगनेंसी टाइप पर निर्भर करती हैं. वहीं, गर्भावस्था के दौरान लिंक का पता लगाना कानूनन अपराध है.

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